सोमवार, 27 मई 2013

96 की उम्र में उग आए सींग

बांका। इसे कुदरत का करिश्मा कहें या शारीरिक विकृति, समझ में नहीं आता। 96 वर्षीय बुजुर्ग के सिर पर तीन इंच लंबा सींग उग आया है। बकरे या अन्य जानवरों के सींगों की तरह ही यह भी मजबूत और नुकीला है। इस अजूबे ने स्थानीय चिकित्सकों को भी हैरत में डाल रखा है। वे भी इसे अपनी तरह का अद्भुत केस मान रहे हैं।
जानकारी के अनुसार अमरपुर प्रखंड के सलेमपुर गांव के जगदीश कापरी के सिर पर यह सींग निकला है। कापरी ने बताया कि छह महीने पहले सर्दियों के दौरान उन्हें सिर के बीच में सींग विकसित होने का एहसास हुआ। जगदीश के रिश्तेदार राजीव कापरी ने बताया कि सर्दियों में जगदीश की ऊनी टोपी फाड़कर सींग बाहर निकल आया। इसके बाद सबका ध्यान इस ओर गया। जगदीश का कहना है कि उन्हें सींग से कोई विशेष तकलीफ नहीं है। मगर, सिर पर असामान्य रूप से सींग निकलने से वे सहमे हुए हैं।
स्थानीय चिकित्सकों से भी समस्या पर बात की गई। सभी पसोपेश में पड़ गए। जगदीश की उम्र के मद्देनजर चिकित्सक शल्य क्त्रिया कर सींग हटाने से भी परहेज कर रहे हैं।
इस बाबत सिविल सर्जन डॉ. एनके विद्यार्थी ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान में हॉर्न यानी सींग निकलने की बात अभी तक सामने नहीं आई है। कभी-कभी शरीर के किसी हिस्से में मांस का अतिरिक्त हिस्सा निकलने के मामले जरूर सामने आते रहे हैं। मगर, ठोस सींग का निकलना बिल्कुल अनोखा मामला है। जल्द ही मेडिकल टीम भेजकर कापरी की जांच कराई जाएगी। तत्पश्चात उनके इलाज पर विचार किया जाएगा।

शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

सरप्राइज गिफ्ट


दुनिया में अपनी गर्लफ्रैंड को सरप्राइज गिफ्ट देने के लिए लोग अजब गजब तरीके अपनाते हैं लेकिन इससे अजीब तरीका शायद ही आपने कहीं देखा या सुना हो। चीन में एक मजनू ने अपनी लैला यानी गर्लफ्रैंड को उसके जन्मदिन पर एक जानदार तोहफा देने की सोची और इसी चक्कर में उसने अपने दोस्त के साथ मिलकर खुद को एक डब्बे में पैक कराकर कोरियर करा दिया और जब उसकी गर्लफ्रैंड तक वो कोरियर पुहंचा तो उसकी हालत इतनी खराब हो चुकी थी की उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
साउथ चीन के सेंग ने अपनी गर्लफ्रैंड को उसके जन्मदिन पर एक अनोखा उपहार देने की सोच एक बॉक्स खरीदा और फिर खुद उस बॉक्स में बैठकर अपने दोस्त को कहा कि उसे उसकी गर्लफ्रैंड के ऑफिस के पते पर कोरियर कर दे। कोरियर करने के बाद वो करीब तीन घंटों के बाद अपनी गर्लफ्रैंड के ऑफिस पहुंचा। इन तीन घंटों में बिना हवा के वो बॉक्स में बंद रहा और जब उसकी गर्लफ्रैंड ने उस बॉक्स को अपने ऑफिस में खोला तो वो तो शॉक्ड रह गई और सेंग खुद बेहोश हो गया। तुरंत ही सेंग को अस्पताल पहुंचाया गया जहां तत्काल उसका इलाज शुरु किया गया।
जब सेंग को होश आया तो उसने बताया कि उसे नहीं मालूम था कि कोरियर पहुंचने में इतनी देर लग जाएगी। उसने ये भी बताया कि उसने उस गत्ते के बॉक्स में छेद करने की कोशिश भी की लेकिन वो गत्ता इतना मोटा था कि उसमें छेद नहीं हो पाया। और वो चिल्लाकर अपनी प्रेमिका के सामने सरप्राइज खराब नहीं करना चाहता था। सेंग की इस बात से सभी को सबक लेना चाहिए कि अगर ऐसा कोई सरप्राइज आप भी प्लान कर रहे हैं तो किसी अच्छी कोरियर कंपनी के कोरियर कराइगा और अपने साथ ऑक्सीजन मास्क जरुर रखें।

गुरुवार, 29 सितंबर 2011

'रहम करो, इस लाचारी भरी तस्वीर का प्रयोग ना करो.....'


 गुजरात में 2002के दंगों के दौरान वे दंगाइयों से हाथ जोड़कर रहम मांग रहे थे। वे अब गुजरात पुलिस से आग्रह कर रहे हैं, ‘प्लीज! मेरी तस्वीर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दें।’

अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर को कुतुबुद्दीन अंसारी ने 9 जून को पत्र लिखा। यह अब प्रकाश में आया है। इसमें उन्होंने लिखा है, ‘आज मैं अपने परिवार के साथ शांति से रह रहा हूं। यही नहीं, मेरे बच्चे भी अच्छे माहौल में रह रहे हैं। मुझे दुख होता है, जब मैं हाथ जोड़े हुए अपनी तस्वीर को अखबारों, वेबसाइटों और स्वयंसेवी संगठनों की रिपोर्टो के कवर पर देखता हूं। इसमें मेरी लाचारी नजर आती है। मैं आग्रह करता हूं कि प्लीज, मेरी तस्वीर के भविष्य में किसी भी तरह के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। साथ ही, सभी जगहों से इसे हटा दिया जाए।’

याद है वह घटना अंसारी ने पत्र में बताया कि जब दंगे शुरू हुए वह शहर के नरोदा इलाके में रहते थे। इलाके में दंगाइयों ने हमला कर दिया। वे भी फंस गए। जब वे उनसे रहम की गुजारिश कर रहे थे, किसी फोटोग्राफर ने तस्वीर खींच ली। बाद में पुलिस ने उन्हें बचाया।
 

बुधवार, 19 जनवरी 2011

एक उंगली से लिखी 50 हजार शब्दों की किताब

सेरिब्रल पाल्सी की वजह से जीवन के 44 बरस व्हीलचेयर पर बिता चुकी मालिनी चिब ने जब अपनी यादों को 50 हजार शब्दों की आत्मकथा का रूप देने का फैसला किया तो उनके पास हाथ की केवल एक उंगली की मदद लेने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं था.
मुंबई निवासी मालिनी की हाल ही में जारी आत्मकथा का शीषर्क ‘वन लिटिल फिंगर’ ही है. 200 पृष्ठों की इस आत्मकथा को लिखने में मालिनी को दो साल से अधिक समय लगा क्योंकि वह बाएं हाथ की तर्जनी से लैपटॉप पर एक एक अक्षर टाइप करती थीं.
विकलांगता और समाज के जड़ रवैये के बावजूद मालिनी ने हार नहीं मानी और तमाम विषमताओं को धता बताते हुए उसने अपनी तर्जनी से टाइपिंग सीखी. बोलने में समस्या होने के बावजूद उन्होंने लाइटराइटर की मदद से बोलने की कोशिश की.
किताब में मालिनी ने इस बीमारी को परास्त करने की अपनी कोशिश, पक्षपात, पूर्वाग्रह, सामाजिक नजरिया और लोगों का अपने प्रति व्यवहार बताने की कोशिश की है.

सोमवार, 27 दिसंबर 2010

क्या बर्फी हिन्दू होती है और जलेबी मुसलमान

 यह मासूम सा सवाल मशहूर शायर मिर्जा गालिब ने अपने उस मुरीद से पूछा था जो एक हिन्दू थे। यहां से उनके घर बर्फी का तोहफा आने पर उनसे पूछा था कि क्या आप हिंदू के यहां से आई बर्फी खा लेगें। जबान और कलम के धनी मिर्जा गालिब ने तपाक से कहा था मुझे पता नहीं था कि बर्फी हिन्दू हो सकती हैं या लड्डू का भी कोई मजहब हो सकता है। जाने माने शायर और फिल्म गीतकार गुलजार ने  इंडियन वुमेन प्रेस कोर द्वारा आयोजित एक प्रेस कांफ्रेस में यह किस्सा सुनाया। उनका कहना था कि हर चीज को दीन का नाम देकर रोजमर्रा की जिन्दगी तबाह कर दी जाती है जिससे देश बर्बाद हो जाते है। संवाददाता सम्मेलन में गालिब के पुस्तक के लेखक तथा भूटान में भारत के राजदूत पवन कुमार वर्मा भी उपस्थित थे।
अंग्रेजी में लिखी गालिब की पुस्तक का हिन्दी अनुवाद गुलजार ने किया है। गुलजार ने कहा कि गालिब सही मायने में धर्म निरपेक्ष व्यक्तित्व थे। सही तो यह है कि वे धार्मिक न होकर आध्यात्मिक व्यक्तित्व थे|
गुलजार ने गालिब की धर्म निरपेक्षमता की चर्चा करते हुए कहा कि वह दीन धर्म के दायरे से परे थे। गालिब के सबसे अच्छे शार्गिद एक हिन्दू मुंशी हर गोपाल गुप्ता ही थे। ऐसी सख्यित को धर्म की सीमा में बांधकर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि गालिब के इंतकाल के बाद उन्हें दफनाने को लेकर शिया तथा सुन्नी समुदाय आपस में उलझ पडे़ जब कि हकीकत यह थी कि गालिब सूफी थे। उन्होंने कहा कि गालिब का मानना था कि धर्म के प्रति संकीर्ण नजरिया बहुत ही छोटा कर देता है |

मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

बापू की तस्वीर गोली से.....

 इसे एक कलाकार की नफरत कहेंगे या हुनर? सर्बियाई मूल के विक्टर मिटिक कैनवास पर बंदूक की गोलियां दागकर तस्वीर बनाते हैं। वह अब तक महात्मा गांधी, बीटल्स समूह के विख्यात गायक जॉन लेनन, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी, ईसा मसीह समेत कई मशहूर हस्तियों की तस्वीरें बना चुके हैं। इनके हस्तियों के बीच समानता यह है कि इन सभी की हत्या हुई थी। विक्टर अपनी इन तस्वीरों के चलते काफी विवादों में रह चुके हैं। वह मृत हस्तियों के चेहरे पर गोलियां चलाते हैं जो कि लोगों को पसंद नहीं आता। अमेरिका के सर्वाधिक लोकप्रिय राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी भी विक्टर द्वारा बनाई तस्वीरों में शामिल हैं। 35 वें अमेरिकी राष्ट्रपति केनेडी को भी नवंबर 1963 में गोली मार दी गई थी। ऐसा नहीं है कि विक्टर ने केवल गोलियों के शिकार व्यक्तियों को ही चित्रित किया है। बल्कि उन्होंने सूली पर लटकाए गए ईसा मसीह पर भी गोलियां चलाई हैं। इसके अलावा उनके संग्रह में हॉलीवुड हस्ती मर्लिन मुनरो और अमेरिकी अभिनेता जॉन वेन और कुछ जीवित हस्तियां भी भी शामिल हैं.

बुधवार, 1 दिसंबर 2010

शरीफ डकैत जोगा

 कुख्यात डकैत जोगा अभी तक अपने साथियों के साथ मिलकर दिल्ली, यूपी और हरियाणा में करीब 130 वा
रदातों को अंजाम दे चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जोगा और उसके गिरोह के बाकी बदमाशों की यह सबसे बड़ी खासियत है कि उन्होंने कहीं पर भी घर के किसी सदस्य के साथ कोई बदतमीजी नहीं की। इसी गिरोह ने कड़कड़डूमा कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली एक महिला वकील के गाजियाबाद स्थित घर में भी डकैती डाली थी। बुधवार दोपहर बाद जब जोगा को कोर्ट मंे पेश किया गया, तो वह महिला वकील उसे देखने आई थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि वारदात के वक्त बदमाश बहुत इज्जत के साथ पेश आ रहे थे। बुजुर्गों को पानी भी पिलाया था। पुलिस अब उस पर मकोका लगाने की तैयारी कर रही है।