सोमवार, 27 दिसंबर 2010

क्या बर्फी हिन्दू होती है और जलेबी मुसलमान

 यह मासूम सा सवाल मशहूर शायर मिर्जा गालिब ने अपने उस मुरीद से पूछा था जो एक हिन्दू थे। यहां से उनके घर बर्फी का तोहफा आने पर उनसे पूछा था कि क्या आप हिंदू के यहां से आई बर्फी खा लेगें। जबान और कलम के धनी मिर्जा गालिब ने तपाक से कहा था मुझे पता नहीं था कि बर्फी हिन्दू हो सकती हैं या लड्डू का भी कोई मजहब हो सकता है। जाने माने शायर और फिल्म गीतकार गुलजार ने  इंडियन वुमेन प्रेस कोर द्वारा आयोजित एक प्रेस कांफ्रेस में यह किस्सा सुनाया। उनका कहना था कि हर चीज को दीन का नाम देकर रोजमर्रा की जिन्दगी तबाह कर दी जाती है जिससे देश बर्बाद हो जाते है। संवाददाता सम्मेलन में गालिब के पुस्तक के लेखक तथा भूटान में भारत के राजदूत पवन कुमार वर्मा भी उपस्थित थे।
अंग्रेजी में लिखी गालिब की पुस्तक का हिन्दी अनुवाद गुलजार ने किया है। गुलजार ने कहा कि गालिब सही मायने में धर्म निरपेक्ष व्यक्तित्व थे। सही तो यह है कि वे धार्मिक न होकर आध्यात्मिक व्यक्तित्व थे|
गुलजार ने गालिब की धर्म निरपेक्षमता की चर्चा करते हुए कहा कि वह दीन धर्म के दायरे से परे थे। गालिब के सबसे अच्छे शार्गिद एक हिन्दू मुंशी हर गोपाल गुप्ता ही थे। ऐसी सख्यित को धर्म की सीमा में बांधकर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि गालिब के इंतकाल के बाद उन्हें दफनाने को लेकर शिया तथा सुन्नी समुदाय आपस में उलझ पडे़ जब कि हकीकत यह थी कि गालिब सूफी थे। उन्होंने कहा कि गालिब का मानना था कि धर्म के प्रति संकीर्ण नजरिया बहुत ही छोटा कर देता है |

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें