क्या आपनें ध्यान दिया है, सड़कों पर तेज़ गति यमदूत जो किसी को कभी भी निशाना बना सकतें हैं. जी हां मेरा ईशारा है उन ट्रैक्टरों की ओर जिन्हे खेती के स्थान पर अन्य वाणिज्यिक उपयोग में लाया जाता है. कृषिकार्यों के लिये निर्मित और सरकार द्वारा केवल कृषि कार्यों हेतू अनुमति प्राप्त इन वाहनों से अक्सर दूर्घटनायें होती रहती हैं.
अभी कुछ दिनों पूर्व मेरे साथ ऐसी एक घटना घटी जिसने मुझे ये पोस्ट लिखने को प्रेरित किया. मैं पिछले १५ सालों से बाईक चला रहा हूं. उपर वाले की दया से अभी तक कोई भी दुर्घटना मेरे साथ नही घटी थी. उस सुबह, जब मैं अपने साईट पर जा रहा था,एक मोड़ पर दाहिनें मोड़ने के लिये मैनें इन्डिकेटर संकेत दिया और बाईक मोड़ दिया तभी सामनें से आता ट्रैक्टर, जो मेरे वाहन को मोड़े जाने के पहले करीब २०० मीटर दूर रहा होगा, अद्भूत तेजी से मेरे वाहन के अगले पहिये को टकराता हूआ आगे एक नालें में गिरकर कर रूका.हालाकिं टक्कर से मुझे केवल कुछ खरोंचें ही लगीं तथा मेरे बाईक की एलोय व्हील चक्का टूट गया, जिसे बदलनें मे कुछ हजार रूपये स्वहा हो गयें , पर मुझें निराशा वहां उपस्थित आम लोगों की चर्चा से हुई.
वह एक कृषि प्रधान गावनुमा कस्बा था. वे लोग ट्रैक्टर चालक,जिसनें अवैध रूप से ट्रोली मे ईटें लाद रखी थीं, के बजाय मुझे दोषी मान रहें थें. दबी जुबान से ट्रैक्टर चालक की प्रंसशा भी की जा रही थी की उसनें मुझे जीवनदान दे दिया और खुद नालें मे चला गया. मेरे तर्कों का किसी पर कोई असर नही था. "ट्रैक्टरों में ब्रेक नहीं होता" और "अपने आपको उनसे दूर रखना चहिये" जैसे जुमलें उछल रहें थें. खैर किसी तरह मैं उस जगह से आगे बढ़ा किन्तु वो मन्जर भुला नही पाया.
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