शीर्षक बेतुका है और थोड़ा अटपटा भी, लेकिन है सोलह आने सच।मामला जबलपुर का है . स्कूल शिक्षा विभाग के एक शिक्षक ने 31 दिसम्बर को सुबह ज्वाइनिंग दी, उसी दिन शाम को वे विभाग से रिटायर हो गए। दरअसल इस शिक्षक पर कई मामलों को लेकर जांच चल रही थी। जांच इतनी लंबी खिंच गई कि उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख आ गई और ये बीच की व्यवस्था तय की गई। हालांकि इस शिक्षक को न तो ज्वाइनिंग की खुशी हुई और न रिटायरमेंट की।
कोर्ट का आर्डर था- ज्वाइनिंग के दिन ही रिटायरमेन्ट का संयोग कोर्ट के उस निर्देश के कारण बन सका, जो कोर्ट ने जिला पंचायत को भेजा था। बताया गया है कि वर्ष 2000 में श्री श्रीवास्तव और विवेक निगम एक से आरोपों में फंसे थे, लेकिन वर्ष 2005 में श्री निगम को बहाल कर दिया गया। इस फैसले के बाद श्री श्रीवास्तव कोर्ट में चले गए। इनका तर्क था कि जब मामला एक सा है तो जांच अलग-अलग कैसे? कोर्ट ने जिला पंचायत को समान कार्रवाई के निर्देश जारी किये, तब श्री श्रीवास्तव बहाल हो सके।
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